पुणे: जिला परिषद के कृषि विभाग ने जिले के 5 हजार 866 किसानों को व्यक्तिगत लाभ योजनाओं के तहत कृषि और कृषि पूरक उपकरणों का लाभ दिया है। इसमें भोर तहसील के सर्वाधिक 883 लाभार्थियों को लाभ मिला है, जबकि हवेली तहसील में सबसे कम, केवल 92 लाभार्थी हैं। कृषि विभाग के फंड के तहत यह लाभ 75 प्रतिशत अनुदान पर प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण (DBT) पद्धति से दिया गया है। प्रशासन ने इस योजना की जानकारी पंचायत स्तर पर दी थी और ग्रामसेवकों ने अपने कार्यक्षेत्र में इसका प्रसार किया।
संबंधित किसानों ने जिला परिषद को ऑनलाइन प्रस्ताव भेजे, जिसका चयन जिला परिषद स्तर पर लकी ड्रा (लॉटरी) पद्धति से किया गया। DBT प्रणाली के माध्यम से योजना के तहत सामग्री का पैसा सीधे लाभार्थी के बैंक खाते में जमा हो जाता है, जिससे भ्रष्टाचार और अनियमितताओं से बचा जा सकता है और समय पर लाभ मिलता है।
वितरित की सामग्री
योजना के तहत 13 प्रकार की कृषि पूरक सामग्री वितरित की जाती है। इस वर्ष उपलब्ध अनुदान के अनुसार चार प्रकार की वस्तुओं का वितरण स्वीकृत किया गया है इसमें 90 एमएम पीवीसी पाइप-1428, बैटरी ऑपरेटेड नैपसैक पंप-1628, प्लास्टिक तिरपाल (टारपॉलिन)-1904 और 5 एचपी इलेक्ट्रिक ओपनवेल विद्युत पंप सेट-906 शामिल हैं।
क्या हैं लाभ के मापदंड
योजना में आवेदक द्वारा किए गए आवेदन की जांच करके आशय पत्र दिया जाता है। इसमें दी गई समय सीमा के भीतर लाभार्थी को खरीद समिति द्वारा निर्धारित मापदंडों की सामग्री पहले स्वयं के खर्च पर खरीदनी होती है। जीएसटी धारक आपूर्तिकर्ताओं से बिक्री रसीद (Sale Receipt) प्रस्तुत करना अनिवार्य है। खरीदी गई सामग्री की गुणवत्ता की जांच जिला परिषद द्वारा निर्धारित कार्यप्रणाली से की जाएगी। अगर सामग्री निर्धारित गुणवत्ता के अनुसार होगी, तभी अनुदान सीधे लाभार्थी के बैंक खाते में जमा किया जाएगा। इसके लिए लाभार्थी को चालू बैंक खाते की पासबुक की जेरॉक्स प्रति देनी होती है।
तहसील-वार लाभार्थियों की संख्या
| तहसील | लाभार्थी संख्या | तहसील | लाभार्थी संख्या |
| आंबेगांव | 525 | खेड़ | 552 |
| बारामती | 607 | मावल | 306 |
| भोर | 883 | मुलशी | 278 |
| दौंड | 471 | पुरंदर | 289 |
| हवेली | 92 | शिरूर | 367 |
| इंदापुर | 799 | राजगढ़ | 149 |
| जुन्नर | 548 |
“उपलब्ध अनुदान से सभी लाभार्थियों का चयन ऑनलाइन पद्धति से किया गया है। अत्यंत पारदर्शी तरीके से काम होने के कारण सभी को समान लाभ मिला है। प्रतीक्षा सूची में लगभग छह हजार लाभार्थी हैं। अनुदान उपलब्ध होने पर उन्हें नियमानुसार लाभ दिया जाएगा।”
– अजित पिसाल, कृषि विकास अधिकारी
