पुणे: स्नातक निर्वाचन क्षेत्र के लिए पात्र नागरिकों को बार-बार पंजीकरण कराना पड़ना, पंजीकरण प्रक्रिया में आने वाली दिक्कतें और पात्र स्नातकों का कम पंजीकरण होना—इन समस्याओं की ओर प्रा. आनंद जेठे ने ध्यान आकर्षित किया है। एक बार स्नातक की डिग्री हासिल कर चुका व्यक्ति जीवनभर स्नातक ही रहता है; इसलिए स्नातक मतदाता पंजीकरण के लिए बार-बार प्रक्रिया दोहराने के बजाय पंजीकरण की एक सरल, पारदर्शी और एक ही बार में पूरी होने वाली व्यवस्था बनाई जानी चाहिए, यह मांग पत्रकार वार्ता में प्रा. आनंद जेठे और प्रा. दीपाली सूर्यवंशी जेठे ने की।
प्रा. आनंद जेठे और प्रा. दीपाली सूर्यवंशी जेठे यह दंपत्ति पुणे संभाग के विधान परिषद चुनाव के मैदान में उतरा है। अजितदादा की सहयोगी पार्टी एनसीएस के अधिकृत उम्मीदवार के रूप में प्रा. आनंद जेठे पुणे संभाग स्नातक निर्वाचन क्षेत्र से, जबकि प्रा. दीपाली सूर्यवंशी जेठे पुणे संभाग शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से चुनाव लड़ रही हैं। दोनों ही शिक्षा क्षेत्र में कार्यरत हैं और आईआईटी-जेईई, नीट, सीईटी, एनडीए, यूपीएससी तथा एमपीएससी जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए विद्यार्थियों को अध्यापन व मार्गदर्शन प्रदान करते हैं।
प्रा. आनंद जेठे को शिक्षा क्षेत्र में उनके उत्कृष्ट कार्य के लिए महाराष्ट्र के तत्कालीन राज्यपाल भगतसिंह कोश्यारी के हाथों राज्यपाल पुरस्कार, साथ ही राज्यस्तरीय क्रांतिसूर्य महात्मा ज्योतिबा फुले पुरस्कार से सम्मानित किया जा चुका है। प्रा. दीपाली सूर्यवंशी जेठे को राष्ट्रीय ‘प्राइड ऑफ भारत’ पुरस्कार और राज्यस्तरीय क्रांतिज्योति सावित्रीबाई फुले पुरस्कार प्राप्त हुए हैं। वे एफएमसी, पुणे में पात्र चुनी गई थीं और तत्कालीन राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल के हाथों उन्हें छात्रवृत्ति सम्मान भी मिल चुका है। उनके अनुसार, पुणे संभाग में वर्तमान में लगभग चार लाख स्नातक और 60 हजार शिक्षकों का पंजीकरण बताया जाता है; हालांकि वास्तविक पात्र स्नातकों और शिक्षकों की संख्या इससे कहीं अधिक होने की संभावना है। इसलिए पात्र नागरिकों का पंजीकरण बढ़ाने के लिए व्यापक जनजागरूकता और सुगम पंजीकरण व्यवस्था आवश्यक है।
आधार कार्ड और अपार आईडी की तर्ज पर प्रत्येक स्नातक के लिए एक स्वतंत्र, सार्वभौमिक पहचान वाला ‘ग्रेजुएट कार्ड’ तैयार किया जाना चाहिए। यह कार्ड विश्वविद्यालय के माध्यम से एक बार निश्चित शुल्क लेकर उपलब्ध कराया जाए और इसके लिए एक अलग, अधिकृत डिजिटल डेटाबेस तैयार किया जाए, यह संकल्पना प्रा. जेठे ने प्रस्तुत की। इस व्यवस्था के जरिए स्नातकों की शैक्षणिक जानकारी उनकी सहमति से तथा उचित गोपनीयता नियमों का पालन करते हुए शासकीय एवं निजी संस्थानों को रोजगार, कौशल विकास, उद्योग और स्वरोजगार के अवसरों के लिए उपलब्ध कराई जा सकेगी, ऐसा उन्होंने बताया।
इसके अलावा, पंजीकरण प्रक्रिया के लिए जिलावार स्वतंत्र तंत्र या सक्षम समितियों का गठन किया जाना चाहिए, पात्र स्नातकों को बार-बार पंजीकरण के लिए शुल्क न देना पड़े और पूरी प्रक्रिया पारदर्शी तथा तकनीक आधारित होनी चाहिए, यह मांग भी उन्होंने रखी। इस संकल्पना से पात्र स्नातकों का पंजीकरण बढ़ने के साथ-साथ रोजगार के अवसर और उद्योग जगत से उनका संपर्क अधिक प्रभावी हो सकता है, यह पक्ष उन्होंने रखा।
शिक्षकों का अधिकांश समय अध्यापन, विद्यार्थियों के मूल्यांकन और शैक्षणिक गुणवत्ता बढ़ाने में ही बीतना चाहिए। लेकिन विभिन्न प्रशासनिक कार्यों, सर्वेक्षणों, रिपोर्टों और अन्य गैर-शैक्षणिक जिम्मेदारियों के कारण अध्यापन पर प्रतिकूल प्रभाव न पड़े, इसके लिए ठोस उपाय किए जाने आवश्यक हैं। शिक्षकों को सम्मानजनक सेवा शर्तें, समय पर वेतन, उचित सेवानिवृत्ति लाभ और शैक्षणिक निर्णय प्रक्रिया में योग्य स्थान मिले, इसके लिए विधान परिषद में शिक्षकों की आवाज प्रभावी ढंग से उठाने का संकल्प उन्होंने व्यक्त किया।
“स्नातकों की पंजीकरण प्रक्रिया सुगम हो, पात्र स्नातकों को बार-बार पंजीकरण शुल्क न देना पड़े, रोजगार और उद्यमिता के अवसर उपलब्ध हों तथा युवा अपने पैरों पर खड़े होकर दूसरों को भी रोजगार प्रदान कर सकें, इसके लिए हम काम करना चाहते हैं। शिक्षकों को उनके न्यायसंगत अधिकारों के लिए एक प्रभावी मंच मिले, उनकी सेवा संबंधी समस्याओं का निपटारा हो और आर्थिक स्थिति के कारण किसी भी मेधावी छात्र की शिक्षा न रुके, इसके लिए हम प्रतिबद्ध हैं। पुणे संभाग के स्नातक व शिक्षक मतदाता हमारे शैक्षणिक एवं सामाजिक कार्यों को समझकर हमें अपना विश्वास और समर्थन दें,” यह अपील प्रा. आनंद जेठे और प्रा. दीपाली सूर्यवंशी जेठे ने की। साथ ही उन्होंने सभी पात्र मतदाताओं से अपने मताधिकार का प्रयोग अवश्य करने का आग्रह भी किया।
